बिहार विधानसभा में पान समाज की आवाज: 65% आरक्षण की मांग और 'हांको रथ हम पान हैं' आंदोलन का प्रभाव!
बिहार विधानसभा में उठी 65% आरक्षण की मांग: 'हांको रथ हम पान हैं' आंदोलन का असर"
कल बिहार विधानसभा में हुए घटनाक्रम ने राज्य की राजनीति को नई दिशा देने का संकेत दिया है। अखिल भारतीय पान महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष आदरणीय आईपी गुप्ता जी द्वारा चलाए जा रहे 'हांको रथ हम पान हैं' आंदोलन का असर अब सदन में भी देखने को मिल रहा है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने 65% आरक्षण लागू करने की मांग उठाते हुए जदयू-भाजपा की आरक्षण नीति पर तीखा हमला बोला।
नेता प्रतिपक्ष का बयान: आरक्षण की सच्चाई उजागर
तेजस्वी यादव ने जदयू और भाजपा पर आरोप लगाते हुए कहा कि ये पार्टियां आरक्षण के मुद्दे पर बार-बार मुकर जाती हैं। उन्होंने विधानसभा में कहा कि पिछड़े, अति पिछड़े और दलित समाज को आरक्षण देने के मुद्दे पर सत्ता पक्ष हमेशा बहाने बनाता है। यह बयान सीधे-सीधे पान समाज और अन्य वंचित समुदायों की पीड़ा को उजागर करता है।
नीतीश सरकार की विफलताएं
सत्ता पक्ष ने दावा किया कि 2006 में एनडीए सरकार ने पिछड़े और अति पिछड़े वर्गों को आरक्षण दिया। लेकिन, यह बात किसी से छिपी नहीं है कि पान समाज को इसके लाभ से वंचित रखा गया।
2001 से 2005 तक की राजनीति का जिक्र करते हुए यह भी कहा गया कि पिछली सरकारों ने न तो पंचायतों में आरक्षण लागू किया और न ही समाज के कमजोर वर्गों के लिए ठोस कदम उठाए।
'हांको रथ हम पान हैं' आंदोलन का बढ़ता प्रभाव
पान समाज को संगठित करने और उनके हक की लड़ाई लड़ने के लिए आदरणीय आईपी गुप्ता जी का आंदोलन अब एक बड़े आंदोलन का रूप ले चुका है। तांती समाज की एकजुटता ने बिहार की राजनीति में नई ऊर्जा भर दी है। यह आंदोलन सत्ता और विपक्ष दोनों को यह दिखा चुका है कि पान समाज अब अपने हक के लिए खड़ा हो चुका है।
सवालों के घेरे में विपक्ष और सत्ता पक्ष
तेजस्वी यादव ने सत्ता पक्ष को कटघरे में खड़ा करते हुए सवाल किया कि जब पान समाज और अन्य वंचित वर्गों को आरक्षण का लाभ नहीं मिला, तब सरकार क्या कर रही थी?
सत्ता पक्ष का जवाब भी सवालों के घेरे में है। उनका यह दावा कि डबल इंजन की सरकार सबके लिए काम कर रही है, पान समाज की हकीकत को देखते हुए खोखला साबित होता है।
आंदोलन को मजबूत करने की जरूरत
यह समय सिर्फ चर्चा का नहीं, बल्कि संगठन को और मजबूत करने का है। 'हांको रथ हम पान हैं' आंदोलन ने जो शुरुआत की है, उसे पूरे राज्य में फैलाने की जरूरत है। पान समाज को अब अपनी ताकत पहचाननी होगी और हर रैली में भारी संख्या में भाग लेकर यह दिखाना होगा कि यह लड़ाई सिर्फ आंदोलन की नहीं, बल्कि अस्तित्व की है।
आगे की रणनीति
आने वाली रैलियों में अधिक से अधिक भागीदारी सुनिश्चित करें।
विधानसभा में उठाए गए सवालों का जवाब जन-जन तक पहुंचाएं।
पान समाज की एकता और आंदोलन की ताकत को और अधिक संगठित करें।
"अब समय आ गया है कि पान समाज अपनी हक की लड़ाई को निर्णायक मोड़ तक ले जाए।"
APM Live News
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