क्या पान समाज की उपेक्षा का अंत करेगा 'हांको रथ हम पान हैं' आंदोलन ?
पान समाज की सियासी हुंकार: नीतीश और मोदी सरकार पर आई.पी. गुप्ता का सीधा सवाल!
बिहार में पान समाज का अधिकार और सम्मान का मुद्दा धीरे-धीरे सियासी गर्मी पकड़ रहा है। हाल ही में चल रहे "हांको रथ हम पान हैं" आंदोलन ने नीतीश कुमार और नरेंद्र मोदी सरकार पर सवाल खड़े करते हुए उन्हें जवाबदेह ठहराया है। इस आंदोलन के प्रमुख, एर. आई.पी. गुप्ता, बिहार में पान समाज को उसके अधिकार दिलाने की लड़ाई को नई ऊँचाई पर ले जा रहे हैं, और अब पान समाज का मुद्दा सिर्फ सामाजिक नहीं, बल्कि एक बड़ा सियासी मुद्दा बन गया है।
मोदी सरकार से सवाल: पान समाज की अनदेखी क्यों?
आई.पी. गुप्ता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सीधा सवाल किया है कि देशभर में पान समाज की उपेक्षा क्यों की जाती है। पान समाज के लोग मेहनती हैं, इतिहास में उनकी बड़ी भूमिका रही है, फिर भी राजनीतिक मुख्यधारा में उन्हें क्यों नहीं जोड़ा जा रहा है? आई.पी. गुप्ता के अनुसार, चाहे कोई भी राजनीतिक दल हो, पान समाज को हमेशा वोट बैंक समझकर अनदेखा किया गया।
नीतीश कुमार सरकार की नीतियों पर सवाल
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर भी निशाना साधते हुए आई.पी. गुप्ता ने कहा कि राज्य में पान समाज को उचित प्रतिनिधित्व क्यों नहीं मिला। बिहार में पान समाज का बहुत बड़ा हिस्सा है, लेकिन उन्हें उनकी हिस्सेदारी क्यों नहीं मिल रही? "हांको रथ हम पान हैं" आंदोलन के दौरान उन्होंने कहा, "नीतीश जी, पान समाज भी बिहार का अभिन्न अंग है। जब हमारे लोग आपके सरकार में उपेक्षित रहेंगे तो हम कब तक चुप रहेंगे?"
'हांको रथ हम पान हैं' आंदोलन: बिहार में नई क्रांति का आगाज
"हांको रथ हम पान हैं" आंदोलन का उद्देश्य केवल पान समाज को राजनीतिक भागीदारी दिलाना नहीं है, बल्कि उनकी आर्थिक स्थिति को सुधारना भी है। इसके तहत आगामी महीनों में अलग-अलग जिलों में बड़ी रैलियों का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें लाखों की संख्या में लोग शामिल होंगे। आंदोलन का कैलेंडर इस प्रकार है:
जयनगर - 17 नवम्बर 2024
दरभंगा - 24 नवम्बर 2024
बेगूसराय - 1 दिसम्बर 2024
सहरसा - 15 दिसम्बर 2024
पूर्णिया - 29 दिसम्बर 2024
जमुई - 10 जनवरी 2025
लखीसराय - 11 जनवरी 2025
भागलपुर - 12 जनवरी 2025
रोहतास - 19 जनवरी 2025
मुंगेर - 31 जनवरी 2025
राजगीर - 2 फरवरी 2025
पटना (गांधी मैदान) - 23 मार्च 2025
जनता का समर्थन: क्यों पान समाज के साथ है बिहार?
इस आंदोलन का असर देखते हुए बिहार की जनता अब पान समाज के अधिकारों की बात खुलकर करने लगी है। गाँव-गाँव में लोग इस आंदोलन का समर्थन कर रहे हैं, जिससे यह आंदोलन केवल एक वर्ग का नहीं बल्कि पूरे समाज का आंदोलन बनता जा रहा है। आई.पी. गुप्ता ने अपनी बात रखते हुए कहा, "हमने हमेशा से अपने समाज के हित के लिए संघर्ष किया है, अब समय आ गया है कि हम अपने हक को पाएं।"
नीतीश और मोदी सरकार को चुनौती
आई.पी. गुप्ता ने अपनी बात को मजबूती से रखते हुए कहा कि यदि सरकारें पान समाज की मांगों को अनदेखा करती रहीं, तो यह आंदोलन और तेज होगा। उन्होंने कहा, "हमारा उद्देश्य किसी एक सरकार को चुनौती देना नहीं है, बल्कि हर उस व्यवस्था को चुनौती देना है जो हमें हमारा हक देने में असफल रही है।" उनका सीधा संदेश था कि अब पान समाज जाग चुका है, और सरकारें इस जनजागरण को नजरअंदाज नहीं कर सकतीं।
आई.पी. गुप्ता और "हांको रथ हम पान हैं" आंदोलन ने जो लहर बिहार में उठाई है, वह एक नई राजनीति का संकेत दे रही है। पान समाज के साथ-साथ अन्य समुदाय भी इस आंदोलन में शामिल हो रहे हैं, जिससे यह स्पष्ट हो रहा है कि यह आंदोलन अब एक बड़े बदलाव का प्रतीक बन चुका है।
आने वाले समय में देखना होगा कि नीतीश कुमार और नरेंद्र मोदी सरकार इस चुनौती का सामना
कैसे करती हैं और पान समाज के लिए क्या कदम उठाती हैं।


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