बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों पर भारत सरकार का मौन

बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों पर भारत सरकार का मौन: क्या ये हमें चुप रहने का अधिकार देता है?
हाल ही में बांग्लादेश में हिंदू समुदाय के खिलाफ हो रही हिंसा और अत्याचारों ने एक बार फिर से हमारे दिलों में सवाल खड़ा किया है। जब से मोहम्मद यूनुस की सरकार ने सत्ता संभाली है, तब से बांग्लादेश में हिंदू समुदाय पर हमले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। यह सिलसिला न सिर्फ राजनीतिक बल्कि धार्मिक उत्पीड़न का भी शिकार बना हुआ है। सवाल यह उठता है कि एक ऐसा देश, जो अपनी तामझाम और शक्ति के बारे में हमेशा शेखी बघारता है, क्या वह अपनी ताकत का सही इस्तेमाल कर रहा है, खासकर जब उसके बगल में हिंदू समुदाय पर इतनी बुरी स्थिति हो रही है?

क्या बांग्लादेश में हो रही हिंसा को नजरअंदाज करना सही है?

भारत, जो आज दुनिया की पांचवी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था और चौथी सबसे बड़ी सैन्य ताकत है, क्या उसकी ताकत सिर्फ सीमा पर ही दिखती है या फिर उसे अपने पास बैठे मुस्लिम बहुल देशों में हो रही हिंसा को रोकने में भी अपनी भूमिका निभानी चाहिए? यही सवाल बांग्लादेश में हो रही हिंदू हिंसा को लेकर उठता है। इस समय वहां हिंदू समुदाय का सफाया हो रहा है और भारत के नज़दीक एक ऐसा संकट खड़ा हो गया है जिसमें हमारे भाई-बहन घिरे हुए हैं।

इंदिरा गांधी ने 1971 में पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) में अपने सैन्य अभियान से लाखों निर्दोष लोगों को पाकिस्तानी फौज के अत्याचारों से बचाया था। क्या अब समय नहीं आ गया कि हम अपनी ताकत का इस्तेमाल करके बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों को रोकें? इस मुद्दे पर चुप्पी साधे रखना क्या भारत सरकार की जिम्मेदारी नहीं बनती?

हिंदू नेताओं और प्रदर्शनकारियों की गिरफ्तारी

बांग्लादेश में हिंदू समुदाय के खिलाफ उठ रही आवाजों को दबाने के लिए वहां की सरकार ने कई हिंदू नेताओं और प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार कर लिया है। इनमें चिन्मय कृष्ण दास जैसे धार्मिक नेता शामिल हैं, जो हिंदू विरोधी हिंसा के खिलाफ खड़े हुए थे। उनके खिलाफ देशद्रोह का मुकदमा दायर किया गया क्योंकि 25 अक्टूबर को हुई उनकी रैली में किसी ने बांग्लादेश के झंडे पर सनातन धर्म का झंडा लगा दिया था।

जब हिंदू समुदाय ने इन मुद्दों को लेकर आवाज उठाई तो उन्हें लाठियों से पीटा गया, आंसू गैस के गोले छोड़े गए, और यहां तक कि जमात-इस्लामी के लोग भी इस हिंसा में शामिल हो गए। क्या हम इस तरह के घटनाक्रम को सिर्फ देख सकते हैं? क्या यही हमारा धर्म और हमारी पहचान है?

बांग्लादेश के अंदर हिंदू विरोधी हिंसा का इतिहास

5 अगस्त को शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद से मोहम्मद यूनुस की सरकार ने हिंदू विरोधी हिंसा में बढ़ोतरी की है। बांग्लादेश के 52 जिलों में 200 से अधिक हमले हुए हैं, जिसमें 22 धार्मिक स्थलों पर हमले किए गए हैं। यहां तक कि दुर्गा पूजा के समय हिंदू मंदिरों को निशाना बनाया गया। ढाका के एक इलाके में खुले में दुर्गा पूजा के पंडाल पर इस्लामिक आतंकियों ने हमला किया और वहां के हिंदुओं को धमकी दी कि अगर पंडाल लगाया तो जिम्मेदारी पुलिस की होगी।

चिटगांव में एक इस्लामिक संगठन के सदस्यों ने मंदिर में घुसकर मजहबी गाने गाए और हिंदू श्रद्धालुओं को धमकी दी कि वे अपना धर्म बदल लें। क्या ऐसी घटनाओं पर हमारी चुप्पी उचित है?

क्या भारत सरकार को बांग्लादेश के खिलाफ सख्त कदम उठाने का वक्त नहीं आ गया?

भारत को अब यह तय करना होगा कि क्या वह अपनी शक्ति का सही उपयोग करेगा और बांग्लादेश जैसे छोटे देश को यह संदेश देगा कि यदि वह हिंदू विरोधी हिंसा को नहीं रोकेगा तो उसका परिणाम क्या होगा? हमें यह भी याद रखना चाहिए कि बांग्लादेश की सरकार को इस पर अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया है।

इज़राइल ने तो यहूदियों के अधिकारों की रक्षा के लिए पूरी दुनिया में सख्त कदम उठाए, तो क्या भारत सरकार हिंदू समुदाय की सुरक्षा के लिए बांग्लादेश पर दबाव नहीं बना सकती?

भारत के विपक्ष का दोहरा रवैया

भारत के विपक्षी दल बांग्लादेश में हो रही हिंसा पर चुप हैं। उन्हें लगता है कि अगर वे बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ हो रही हिंसा की आलोचना करेंगे तो उनका वोट बैंक नाराज हो जाएगा। लेकिन यही वो मुद्दे हैं जिन पर हमें अपनी आवाज उठानी चाहिए।

भारत सरकार से सवाल उठाना जरूरी है कि अगर वह हिंदू धर्म का रक्षक होने का दावा करती है, तो बांग्लादेश में हो रहे इन अत्याचारों को रोकने के लिए क्यों नहीं कदम उठाती?

आज बांग्लादेश में लाखों हिंदू अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं। यदि भारत इस मौके पर उनका साथ नहीं देता, तो वह भी पाकिस्तान और अफगानिस्तान की तरह मूक दर्शक बनकर रह जाएगा, और बांग्लादेश से हिंदू समुदाय की समाप्ति का भी खतरा बन जाएगा। समय आ गया है कि हम इस मुद्दे को नजरअंदाज न करें और भारत सरकार से यह सवाल करें कि आखिर कब तक हम अपने भाई-बहनों को ऐसे जुल्म सहते हुए देखेंगे?

आपका क्या मानना है?

आपको क्या लगता है कि भारत को इस मुद्दे पर बांग्लादेश के खिलाफ ठोस कदम उठाने चाहिए? क्या हमें बांग्लादेश में हिंदू समुदाय की रक्षा के लिए सरकार पर दबाव बनाना चाहिए? अपने विचार कमेंट में जरूर साझा करें और इस मुद्दे को व्यापक रूप से फैलाने के लिए इस पोस्ट को अपने दोस्तों तक पहुंचाएं।

 #HinduRights #BangladeshViolence #APMLiveNews 

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

तांती–ततवा, पान और आरक्षण विवाद पर बिहार सरकार का बड़ा खुलासा, कई लंबित मामलों का जवाब आया सामने

क्या बिहार में बेटियों को न्याय तभी मिलता है, जब मामला विधानसभा पहुंचे

बिहार में अपराध काबू से बाहर – पान समाज पर लगातार हमले, सरकार खामोश, इंडियन इंकलाब पार्टी की कड़ी चेतावनी