क्या बिहार की सरकार ने पान समाज को वोट बैंक समझ लिया है? IP Gupta का बड़ा आरोप, पान समाज की लड़ाई तेज़!
क्या बिहार की सरकार ने पान समाज को वोट बैंक समझ लिया है? IP Gupta का बड़ा आरोप, पान समाज की लड़ाई तेज़!
क्या आप मानते हैं कि बिहार की सरकार पान समाज को सिर्फ एक वोट बैंक समझती है? क्या पान समाज की समस्याओं को सत्ता के गलियारों में नजरअंदाज किया जा रहा है? अगर नहीं, तो आप भी शायद वही सोचेंगे जो Er. IP Gupta ने हाल ही में कहा। एक सशक्त आवाज, जो पान समाज के हक के लिए खड़ी हो चुकी है, उन्होंने सीधा आरोप लगाया कि सरकार ने हमारे समाज को पूरी तरह से नकार दिया है।
"हमारी आवाज को दबाने की साजिश!"
IP Gupta ने कहा, "हमने कई बार समय मांगा, लेकिन हमसे मिलने का वक्त कभी नहीं मिला। दूसरे लोग मिलते रहे, लेकिन हमको जूते की नोक पर रखा गया। क्या यह हमारी औकात है?" उनकी ये बातें बिहार की राजनीति में तहलका मचा सकती हैं। वह आरोप लगाते हैं कि राज्य सरकार ने पान समाज के भविष्य को पूरी तरह से नजरअंदाज किया है और कभी इस समाज की समस्याओं का समाधान नहीं किया।
क्या वह सही कह रहे हैं? क्या भाजपा सरकार ने पान समाज के हक में कभी कोई ठोस कदम नहीं उठाया? यह सवाल आज बिहार की राजनीति में तूल पकड़ रहे हैं। Er. IP Gupta ने कहा, "आपके पास एक और मौका था। आप फोन उठाते और अमित शाह जी से कहते, 'हमारे बिना आपकी सरकार नहीं चल सकती। हमारे पान समुदाय को बचाने के लिए एक अध्यादेश लाओ।'"
"सरकार ने हमें नाली के कीड़े जैसा समझा!"
Gupta ने एक और गंभीर आरोप लगाया, "जब हमारे बच्चे, लड़के और लड़कियां दिल्ली में शिक्षा प्राप्त करने गए, तो उन्हें अचानक से नौकरी से निकाल दिया गया। हमारी नौकरियां रद्द कर दी गईं। आज हमारे बच्चों के सामने बेरोजगारी की गंभीर समस्या है। और इसके लिए जिम्मेदार कौन है?"
उन्होंने यह भी कहा कि जब बिहार सरकार को पान समाज के हक में फैसले लेने चाहिए थे, तो उन्होंने अपना वक्त गवा दिया और समाज की तकलीफों को नजरअंदाज किया। "आपने हमारे बच्चों को नाली के कीड़े जैसा समझा, जो कभी बेहतर जीवन नहीं जी सकते।"
"हांको रथ हम पान हैं: एक आंदोलन का जन्म"
IP Gupta ने कहा, "जब हमें समुद्र में फेंक दिया गया, तो हम सिर्फ डूबने के लिए नहीं थे। हम तो बड़े समुद्री जीवों से लड़ने के लिए पैदा हुए थे।" यही प्रेरणा थी जिसने उन्हें 'हांको रथ हम पान हैं' आंदोलन शुरू करने के लिए मजबूर किया। एक ऐसा आंदोलन जो पान समाज के अस्तित्व की लड़ाई बन चुका है। उन्होंने यह भी कहा, "हमारा समाज बिना किसी इतिहास के जी रहा है। जब तक हमारा इतिहास नहीं होगा, हमारा भविष्य भी नहीं होगा। और हमें अपना इतिहास बनाना होगा!"
यह संघर्ष अब सिर्फ बिहार तक सीमित नहीं है। यह एक राष्ट्रीय मुद्दा बन चुका है। क्या पान समाज का इतिहास बनेगा या यह हमेशा सत्ता के खेल में दबा रहेगा?
क्या बिहार की सरकार सुनेगी हमारी आवाज?
Will the Bihar Government Listen to the Pan Community?
पान समाज का यह सवाल सिर्फ एक आंदोलन का सवाल नहीं, बल्कि एक बडी़ राजनीतिक परीक्षा का भी सवाल है। क्या सरकार सचमुच अपनी नीतियों में बदलाव लाएगी? क्या हमारे बच्चों का भविष्य अब उज्जवल होगा या ये लड़ाई इसी तरह जारी रहेगी? "It's time for change!"
आज पान समाज को एकजुट करने का समय है, और इस लड़ाई में Er. IP Gupta ने जो कदम उठाए हैं, वह इसे ऐतिहासिक बना सकते हैं।
क्या बिहार की सत्ता पान समाज को अब वो सम्मान देगी जिसकी वह हकदार है? या यह समाज इसी तरह अन्याय और भेदभाव का सामना करता रहेगा?
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