शशि भूषण जी का आह्वान: आरक्षण वापसी के लिए 02 फरबरी राजगीर और 23 मार्च पटना रैलियों में पान समाज एकजुट हो

हांको रथ हम पान हैं आंदोलन: मिरगंज, नलंदा में पान समाज की आरक्षण वापसी की मांग
नलंदा, बिहार – हांको रथ हम पान हैं आंदोलन का सिलसिला बिहार के विभिन्न हिस्सों में जारी है, और इस बार मिरगंज, नलंदा में पान समाज ने एक बड़ा कदम उठाया। आंदोलन के समर्थक एवं पान समाज के नेता शशि भूषण जी, जो कि अखिल भारतीय पान महासंघ के प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष हैं, ने यहाँ एक अहम कार्यक्रम में भाग लिया, जिसमें पान समाज के आरक्षण की वापसी की मांग उठाई गई।

इस कार्यक्रम में, शशि भूषण जी ने अपने संबोधन में कांग्रेस, राजद, जदयू, और भाजपा की नीतियों की आलोचना करते हुए कहा, “कांग्रेस, राजद और जदयू ने पान समाज के अधिकारों की अनदेखी की है, और भाजपा भी अब तक हमारे अधिकारों की रक्षा नहीं कर पाई है। हम अब किसी भी पार्टी के गुलाम नहीं रहेंगे। हम सिर्फ अपने अधिकारों के लिए लड़ेंगे।”

उन्होंने यह भी कहा कि यह आंदोलन सिर्फ आरक्षण की वापसी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पान समाज की राजनीतिक पहचान और ताकत को भी स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। "2025 में मुख्यमंत्री पान समाज का प्रतिनिधि बनेगा और यह वही नेता होगा जो हमारे अधिकारों को मान्यता देगा," उन्होंने कहा।

शशि भूषण जी ने इस आंदोलन के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा, "हम पान समाज को अपने हक के लिए लड़ने की प्रेरणा देने के लिए बिहार के हर जिले में इस आंदोलन को फैलाएंगे। हमारी अंतिम रैली 23 मार्च 2025 को पटना के गांधी मैदान में होगी, जहां हम अपने अधिकारों के लिए एकजुट होकर ऐतिहासिक निर्णय लेंगे।"

इसके साथ ही, उन्होंने आगामी रैलियों का आह्वान भी किया। शशि भूषण जी ने 12 जनवरी 2025 को भागलपुर में होने वाली रैली, 19 जनवरी 2025 को जमुई में और 31 जनवरी 2025 को मुंगेर में होने वाली रैलियों में पान समाज के लोगों से बड़ी संख्या में शामिल होने की अपील की। इसके अलावा, उन्होंने 2 फरवरी 2025 को राजगीर में और 9 फरवरी 2025 को समस्तीपुर (पटेल मैदान) में होने वाली रैलियों में भी भाग लेने का आह्वान किया।

इस अवसर पर पान समाज के कई प्रमुख नेता भी मौजूद थे, और उन्होंने एकजुट होकर इस आंदोलन को सफल बनाने का संकल्प लिया।

इस कार्यक्रम से एक बार फिर यह स्पष्ट हो गया कि पान समाज का हक और आरक्षण की वापसी अब एक प्रमुख राजनीतिक मुद्दा बन चुका है। मिरगंज के इस कार्यक्रम में शामिल लोगों ने अपने समर्थन का संदेश दिया और अब यह आंदोलन बिहार की राजनीति में एक नई दिशा की ओर अग्रसर हो रहा है। 

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