नीतीश सरकार की पुलिस में जातिवाद का कहर: छोटी जात का एसएचओ बर्दाश्त नहीं हुआ: मानसिक प्रताड़ना ने ले ली मटियरिया थाना प्रभारी अंकित कुमार दास की जान !
बिहार पुलिस में जातिवाद का काला चेहरा: मटियरिया थाना प्रभारी अंकित कुमार दास की मौत का सच, छोटी जात का एसएचओ बर्दाश्त नहीं हुआ: मानसिक प्रताड़ना ने ले ली मटियरिया थाना प्रभारी अंकित कुमार दास की जान!
बिहार के पश्चिम चंपारण जिले के मटियरिया थाना प्रभारी अंकित कुमार दास की मौत ने पुलिस प्रशासन और समाज में गहरे बैठे जातिगत भेदभाव को उजागर कर दिया है।
जातिवाद के साये में मानसिक प्रताड़ना की कहानी
अंकित कुमार दास, जो तांती समाज से आते थे, को न केवल उनके सीनियर अधिकारियों, बल्कि उनके सहकर्मियों ने भी उनके जातिगत पृष्ठभूमि के कारण प्रताड़ित किया। उनकी पत्नी पूजा कुमारी सक्सेना ने बेहद भावुक होकर बताया कि उनके पति को लगातार जातिवादी टिप्पणियों और तानों का सामना करना पड़ा।
उन्होंने कहा, "छोटी जाति का थाना प्रभारी कैसे बन गया?" यह सवाल ही नहीं, बल्कि मानसिक प्रताड़ना का हथियार बन गया था। सहकर्मी उन्हें सलामी तक देने से इंकार करते थे, और उनके डीएसपी जयप्रकाश सिंह फोन पर अभद्र भाषा का इस्तेमाल कर उन्हें अपमानित करते थे।
घरेलू जीवन और अंतिम संघर्ष
महज तीन साल पहले शादी के बंधन में बंधे अंकित कुमार दास के दो छोटे बच्चे हैं। लेकिन एक खुशहाल परिवार की तस्वीर उनकी पत्नी के दर्दभरे शब्दों में टूटती दिखी। पूजा कुमारी ने कहा, "उन्हें इतना प्रताड़ित किया गया कि उनका आत्मविश्वास ही नहीं, बल्कि उनका जीवन भी उनसे छीन लिया गया।"
परिवार के अनुसार, अंकित को मानसिक दबाव इतना बढ़ाया गया कि उनके स्वास्थ्य पर असर पड़ने लगा। उनके हाथों में एक बीमारी विकसित हो गई, जो पहले नहीं थी। उनकी पत्नी का आरोप है कि यह सब धीरे-धीरे मानसिक और शारीरिक टॉर्चर का परिणाम था।
डीएसपी और सहकर्मियों पर गंभीर आरोप
पूजा कुमारी ने सीधे तौर पर डीएसपी जयप्रकाश सिंह और मटियरिया थाने के अन्य अधिकारियों पर जातिवादी मानसिकता के आरोप लगाए। उन्होंने कहा, "सब लोग मिलकर उन्हें हटाने की साजिश कर रहे थे क्योंकि वह छोटी जाति से थे।"
उनका कहना है कि सहकर्मी और अधिकारी उन्हें "छोटी जात" कहकर अपमानित करते और उनका नाम लेने की बजाय तानों से बुलाते।
क्या मानसिक प्रताड़ना से हुई मौत?
यह घटना समाज और पुलिस प्रशासन में गहरी जड़ें जमाए जातिवाद पर सवाल खड़ा करती है। एक सवाल जो अंकित कुमार दास की मौत से हर किसी को झकझोर रहा है:
क्या हम ऐसे समाज में जी रहे हैं जहां जाति आज भी किसी की योग्यता पर भारी पड़ती है?
पीड़ित परिवार से मिलने का आश्वासन
'हांको रथ हम पान हैं' आंदोलन के प्रमुख Er. IP Gupta ने इस घटना पर गहरा शोक व्यक्त किया। उन्होंने कहा,
"यह हार्ट अटैक नहीं, बल्कि मानसिक प्रताड़ना से हुई मौत है। मैं पीड़ित परिवार से मिलने ठाकुरगंज, किशनगंज जाऊंगा और उनकी हरसंभव मदद करूंगा।"
जरूरत है न्याय और बदलाव की
यह घटना सिर्फ एक मौत नहीं है, बल्कि समाज को अपने भीतर झांकने की चुनौती है। क्या हम जातिवाद की इस बीमारी से कभी मुक्त हो पाएंगे?
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