बिहार पुलिस भर्ती विवाद: योग्य अभ्यर्थियों के साथ अन्याय, हजारों का प्रदर्शन जारी !

बिहार पुलिस भर्ती विवाद: योग्य अभ्यर्थियों के साथ अन्याय, हजारों का प्रदर्शन जारी
पटना, बिहार:
बिहार में पुलिस भर्ती प्रक्रिया में अचानक नियम बदलाव से हजारों योग्य अभ्यर्थियों को भारी संकट का सामना करना पड़ रहा है। राजधानी पटना के गर्दनीबाग धरना स्थल पर पिछले दो दिनों से लगभग 800 सफल अभ्यर्थी अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हुए हैं।

क्या है मामला?

2023 में बिहार पुलिस में 2139 पदों पर भर्ती के लिए प्रक्रिया शुरू की गई थी, जिसमें लगभग 13 लाख बेरोजगारों ने आवेदन किया। लिखित परीक्षा में 1,07,000 अभ्यर्थियों ने सफलता हासिल की, लेकिन फिजिकल टेस्ट से पहले अचानक एक नया नियम लागू कर दिया गया। केंद्रीय चयन परिषद (CSBC) ने निर्देश दिया कि सभी सफल अभ्यर्थियों को EWS और एनसीएल सर्टिफिकेट पुरानी तारीख का जमा करना होगा।

अभ्यर्थियों का आरोप है कि यह जानकारी अधिसूचना में पहले से नहीं दी गई थी। इससे न केवल उनकी उम्मीदों पर पानी फिरा, बल्कि उनका चयन भी खतरे में पड़ गया है।

अभ्यर्थियों का गुस्सा

धरने पर बैठे युवाओं ने सरकार और अधिकारियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। उनका कहना है:

“हमने कड़ी मेहनत से परीक्षा पास की, लेकिन अचानक नियम बदलकर हमारे सपनों को तोड़ा जा रहा है।”

“डॉक्यूमेंट की इस शर्त को लागू करने से सैकड़ों योग्य उम्मीदवार बाहर हो सकते हैं।”


मंत्री और मुख्यमंत्री तक नहीं पहुंची आवाज?

अभ्यर्थियों का यह भी कहना है कि उनकी समस्याएं न तो मुख्यमंत्री तक पहुंच पा रही हैं और न ही किसी मंत्री या अधिकारी से उन्हें कोई समाधान मिल रहा है। प्रदर्शन में बेटियां भी शामिल हैं, जो सवाल कर रही हैं, “अगर सरकार को भर्ती ही नहीं करनी थी, तो इतने बेरोजगारों को क्यों परेशान किया?”

अचानक नियम बदलाव क्यों?

यह बदलाव परीक्षा प्रक्रिया के अंतिम चरण में किया गया, जिससे अभ्यर्थी इसे सरकार की लापरवाही मान रहे हैं। उनका कहना है कि यह बेरोजगारी और शोषण को बढ़ावा देने का एक और उदाहरण है।

क्या होगा आगे?

धरने पर बैठे युवाओं का यह प्रदर्शन अनिश्चितकालीन है। वे मांग कर रहे हैं कि फिजिकल टेस्ट से पहले इस नए नियम को वापस लिया जाए। सरकार के रवैये और इस मुद्दे पर अधिकारियों की चुप्पी ने मामले को और तूल दे दिया है।

बिहार पुलिस भर्ती का यह विवाद राज्य के युवाओं में बढ़ती बेरोजगारी और सरकार की नीतियों पर सवाल खड़ा करता है। अब देखना होगा कि सरकार इस मुद्दे को सुलझाने के लिए क्या कदम उठाती है या बेरोजगारों का यह गुस्सा और बड़ा आंदोलन बनकर उभरता है।

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

तांती–ततवा, पान और आरक्षण विवाद पर बिहार सरकार का बड़ा खुलासा, कई लंबित मामलों का जवाब आया सामने

क्या बिहार में बेटियों को न्याय तभी मिलता है, जब मामला विधानसभा पहुंचे

बिहार में अपराध काबू से बाहर – पान समाज पर लगातार हमले, सरकार खामोश, इंडियन इंकलाब पार्टी की कड़ी चेतावनी