बिहार चुनाव 2025: नए समीकरण, नई लड़ाई और ‘नीतीश-बीजेपी में तकरार, ‘हांको रथ हम पान हैं’ आंदोलन का बढ़ता असर तेजस्वी चिराग की नई राह
बिहार की राजनीति: सियासी खेल, गठबंधन की चालें और बदलते समीकरण
बिहार की राजनीति इस समय उथल-पुथल के दौर से गुजर रही है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार के बयान से यह साफ हो गया है कि जेडीयू अब किसी भी राजनीतिक अनिश्चितता को बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है। निशांत ने एनडीए से आधिकारिक घोषणा की मांग की है कि आगामी चुनाव नीतीश कुमार के नेतृत्व में लड़ा जाएगा।
लेकिन क्या यह इतना आसान होगा? बिहार की राजनीति में हर दिन नया मोड़ आ रहा है। ‘हांको रथ हम पान हैं’ आंदोलन से लेकर बीजेपी-जेडीयू गठबंधन की खींचतान, आरजेडी की रणनीति, लोजपा (रामविलास) और लोजपा (चिराग) की पोजिशनिंग, कांग्रेस का दांव, और वामपंथी दलों की सोच—यह सब मिलाकर बिहार में एक बड़े सियासी खेल की जमीन तैयार हो रही है।
बीजेपी और जेडीयू: भरोसा है या बस दिखावा?
बीजेपी और जेडीयू का रिश्ता हमेशा से "साम-दाम-दंड-भेद" की राजनीति का शिकार रहा है।
2017 में नीतीश कुमार ने आरजेडी से नाता तोड़कर बीजेपी के साथ सरकार बनाई थी।
2022 में फिर से उन्होंने पाला बदला और महागठबंधन में चले गए।
2024 के लोकसभा चुनाव से पहले उन्होंने फिर से एनडीए का हाथ थाम लिया।
अब जब चुनाव पास आ रहे हैं, तो बीजेपी नीतीश कुमार को कितना भरोसेमंद मानती है, यह एक बड़ा सवाल है। निशांत कुमार के बयान से साफ है कि जेडीयू को बीजेपी की नीयत पर संदेह है।
बीजेपी के सम्राट चौधरी और विजय सिन्हा जैसे युवा नेता तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि
क्या बीजेपी 2025 के चुनाव में नीतीश कुमार के चेहरे पर दांव लगाएगी?
या फिर महाराष्ट्र मॉडल अपनाकर जेडीयू में फूट डाल देगी?
आरजेडी और तेजस्वी यादव: वापसी की तैयारी में?
नीतीश कुमार से अलग होने के बाद तेजस्वी यादव की अगुवाई में आरजेडी फिर से अपनी जमीनी पकड़ मजबूत कर रही है।
आरजेडी लगातार सामाजिक न्याय की बात कर रही है और ओबीसी-एससी-एसटी समुदाय को गोलबंद करने में लगी है।
तेजस्वी यादव ने "नई सोच, नया बिहार" का नारा दिया है और युवा वोटर्स को अपने पक्ष में लाने की कोशिश कर रहे हैं।
आरजेडी नीतीश कुमार को "भरोसे के लायक नहीं" बताकर बीजेपी से दूरी बनाने की अपील कर रही है।
‘हांको रथ हम पान हैं’ आंदोलन: बिहार की राजनीति में नया फैक्टर?
बिहार की राजनीति में अब ‘हांको रथ हम पान हैं’ आंदोलन भी एक बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है। एर. आई.पी. गुप्ता के नेतृत्व में यह आंदोलन पूरे बिहार में फैल चुका है और समाज के दबे-कुचले वर्गों की आवाज बन रहा है।
‘हांको रथ हम पान हैं’ आंदोलन ने बिहार के सभी बड़े नेताओं से कुछ अहम सवाल पूछे हैं:
1. पान (तांति) समाज को राजनीतिक प्रतिनिधित्व क्यों नहीं मिलता?
2. बिहार में सत्ता हमेशा कुछ खास जातियों तक ही सीमित क्यों रहती है?
3. बिहार के राजनीतिक दल पान समाज को सिर्फ वोट बैंक क्यों समझते हैं, नेतृत्व क्यों नहीं सौंपते?
इस आंदोलन की बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए अब बीजेपी, जेडीयू, आरजेडी और अन्य दलों को इस पर प्रतिक्रिया देनी पड़ रही है। अगर यह आंदोलन और मजबूत हुआ, तो यह बिहार की राजनीति में एक नया समीकरण बना सकता है।
चिराग पासवान और लोजपा (रामविलास): खेल बिगाड़ सकते हैं?
चिराग पासवान बिहार की राजनीति में "किंगमेकर" बनने की कोशिश कर रहे हैं।
2019 में वह एनडीए का हिस्सा थे, लेकिन 2020 में उन्होंने अकेले चुनाव लड़ा।
2024 लोकसभा चुनाव में उन्होंने बीजेपी से तालमेल किया और सीटें जीतीं।
अब 2025 के विधानसभा चुनाव में वह क्या करेंगे, यह अभी तय नहीं है।
अगर चिराग पासवान एनडीए से बाहर जाते हैं, तो यह बीजेपी और जेडीयू दोनों के लिए नुकसानदेह हो सकता है।
कांग्रेस और वामपंथी दल: हाशिए पर या फिर वापसी की तैयारी?
कांग्रेस बिहार में "महागठबंधन का नेतृत्व" करना चाहती है, लेकिन आरजेडी इसकी इजाजत नहीं देगा।
कांग्रेस की राजनीति फिलहाल केंद्र विरोध पर टिकी हुई है।
वाम दल सामाजिक आंदोलनों में अपनी जगह बना रहे हैं, लेकिन उनके पास कोई बड़ा चेहरा नहीं है।
बिहार में आगे क्या होगा?
बिहार में चुनाव से पहले बड़े राजनीतिक उलटफेर संभव हैं।
1. क्या बीजेपी नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित करेगी?
2. क्या जेडीयू आरजेडी के साथ फिर से कोई नया गठबंधन बना सकती है?
3. क्या ‘हांको रथ हम पान हैं’ आंदोलन बिहार की राजनीति में नया समीकरण खड़ा करेगा?
4. क्या चिराग पासवान एनडीए में बने रहेंगे या फिर अलग रास्ता चुनेंगे?
5. क्या बिहार में कोई तीसरा विकल्प उभरेगा?
बिहार की राजनीति में हर दिन नया मोड़ आ रहा है।
नीतीश कुमार खुद को "अल्टीमेट डीलमेकर" साबित करना चाहते हैं।
बीजेपी अपने विकल्पों पर विचार कर रही है।
आरजेडी वापसी की कोशिश कर रही है।
‘हांको रथ हम पान हैं’ आंदोलन बिहार की सत्ता समीकरण को बदल सकता है।
अगले कुछ महीनों में बिहार की राजनीति में कई बड़े फैसले लिए जाएंगे। अब देखना यह है कि कौन सा नेता कितना बड़ा दांव खेलता है और कौन सी पार्टी बिहार की जनता को अपने पक्ष में कर पाती है।
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