रवीन्द्र कुमार ताँती की जीवनी, राबड़ी देवी के लिए छोड़ी MLC की सीट और 2015 में आरक्षण के लिए इस्तीफा

बिहार की राजनीति में रवीन्द्र कुमार ताँती एक ऐसे नेता के रूप में याद किए जाते हैं, जिन्होंने विधान परिषद की राजनीति में अपनी जगह बनाई और पान-स्वांसी, चौपाल तथा बुनकर समाज के बीच भी सक्रिय भूमिका निभाई। वे बिहार विधान परिषद के पूर्व सदस्य रहे, अति पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष पद पर रहे और अपने राजनीतिक जीवन के अंतिम वर्षों में जनता दल यूनाइटेड (JDU) से जुड़े थे।
उनके राजनीतिक जीवन की दो घटनाएँ खास तौर पर चर्चा में आती हैं। पहली, वर्ष 1997 में राबड़ी देवी को विधान परिषद का सदस्य बनाने के लिए अपनी MLC सीट छोड़ना। दूसरी, जुलाई 2015 में बिहार के अति पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष पद से इस्तीफा देना। इन दोनों घटनाओं के पीछे की परिस्थितियाँ अलग-अलग थीं और इनके बारे में उपलब्ध दस्तावेजों को अलग-अलग समझना जरूरी है।

 रवीन्द्र कुमार ताँती कौन थे?
रवीन्द्र कुमार ताँती बिहार के पटना जिले के फतुहा क्षेत्र के मकसूदपुर के रहने वाले थे। वे बिहार के पूर्व विधान पार्षद और बिहार राज्य अति पिछड़ा वर्ग आयोग के पूर्व अध्यक्ष थे। वे पान-स्वांसी, चौपाल और बुनकर समाज से जुड़े संगठनों में भी सक्रिय रहे। वर्ष 2020 में उन्हें पान स्वांसी, चौपाल, बुनकर महादलित संघ का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है। अपने राजनीतिक जीवन के अंतिम समय में वे जनता दल यूनाइटेड के प्रदेश महासचिव भी थे। 

वर्ष 1996 में पहली बार बने विधान पार्षद
रवीन्द्र कुमार ताँती का राजनीतिक सफर वर्ष 1996 में महत्वपूर्ण मोड़ पर पहुँचा, जब वे बिहार विधान परिषद के सदस्य बने। उस समय बिहार की राजनीति में लालू प्रसाद यादव का प्रभाव था। विधान परिषद का सदस्य बनने के बाद वे राज्य की राजनीति में सक्रिय रहे। वर्ष 1997 में उनकी सदस्यता छोड़ने की घटना चर्चा में आई। उस समय राबड़ी देवी बिहार की मुख्यमंत्री बनी थीं और उन्हें विधानमंडल का सदस्य बनना था।

वर्ष 1997 में राबड़ी देवी के लिए छोड़ी MLC की सीट
वर्ष 1997 में राबड़ी देवी मुख्यमंत्री बनीं। मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्हें विधानमंडल का सदस्य बनना आवश्यक था। उस समय रवीन्द्र कुमार ताँती ने अपनी विधान परिषद की सीट छोड़ दी, जिससे राबड़ी देवी के विधान परिषद में प्रवेश का रास्ता बना। यह उनके राजनीतिक जीवन की एक महत्वपूर्ण घटना थी। अपनी सीट छोड़ने के बाद भी उनका राजनीतिक सफर समाप्त नहीं हुआ। वर्ष 1998 में वे दोबारा विधान परिषद के सदस्य बने और उपलब्ध जानकारी के अनुसार वर्ष 2004 तक इस पद पर रहे।

अति पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष बने
विधान परिषद के सदस्य रहने के अलावा रवीन्द्र कुमार ताँती बिहार राज्य अति पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष भी बने। इस पद पर रहते हुए उनका संबंध अति पिछड़े वर्गों की समस्याओं और उनसे जुड़े प्रशासनिक मामलों से रहा।
वर्ष 2012 में फारबिसगंज क्षेत्र में अधिकारियों के साथ हुई चर्चा के दौरान जाति प्रमाणपत्र जारी करने और पिछड़े वर्गों के विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति मिलने से जुड़ी समस्याएँ उठाई गई थीं। इससे उनके सार्वजनिक कार्यों में जाति प्रमाणपत्र और शिक्षा से जुड़े मुद्दों की भूमिका का पता चलता है।
वर्ष 2015 में आयोग के अध्यक्ष पद से इस्तीफा
रवीन्द्र कुमार ताँती के राजनीतिक जीवन की एक महत्वपूर्ण घटना जुलाई 2015 में हुई, जब उन्होंने बिहार राज्य अति पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया।
बिहार गजट के असाधारण अंक में प्रकाशित सामान्य प्रशासन विभाग की अधिसूचना के अनुसार, उनका इस्तीफा 13 जुलाई 2015 के अपराह्न से प्रभावी माना गया। 20 जुलाई 2015 को प्रकाशित अधिसूचना में उनके त्यागपत्र को स्वीकार किए जाने की जानकारी दी गई थी। तांती-ततवा आरक्षण के लिए इस्तीफा दिया। तांती-ततवा समाज के लिए यह सवाल महत्वपूर्ण है कि रवीन्द्र कुमार ताँती ने इस्तीफा दिया था।

वर्ष 2020 में वे पान स्वांसी, चौपाल, बुनकर महादलित संघ के प्रदेश अध्यक्ष के रूप में सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों में शामिल थे। इसी दौरान वे बिहार विधानसभा चुनाव की तैयारियों के सिलसिले में पूर्णिया जिले के रूपौली क्षेत्र भी पहुँचे थे। वे समाज से जुड़े संगठनों और राजनीतिक कार्यों में सक्रिय बने रहे। जनता दल यूनाइटेड में प्रदेश महासचिव रहे, अपने राजनीतिक जीवन के अंतिम वर्षों में रवीन्द्र कुमार ताँती जनता दल यूनाइटेड से जुड़े थे। वे पार्टी के प्रदेश महासचिव रहे। उनके राजनीतिक सफर में अलग-अलग समय पर विभिन्न राजनीतिक जिम्मेदारियाँ शामिल रहीं।

लालू प्रसाद यादव के दौर में विधान परिषद पहुँचना, राबड़ी देवी के लिए अपनी सीट छोड़ना, दोबारा विधान परिषद का सदस्य बनना और बाद में JDU में प्रदेश महासचिव की जिम्मेदारी निभाना उनके राजनीतिक जीवन के महत्वपूर्ण पड़ाव थे।

समाज में आज भी याद किए जाते हैं
रवीन्द्र कुमार ताँती के निधन के बाद भी पान समाज और उनसे जुड़े संगठनों के कार्यक्रमों में उन्हें याद किया जाता रहा है। अगस्त 2023 में मुंगेर जिले के हवेली खड़गपुर में पान स्वांसी, चौपाल बुनकर महादलित संघ की जिला कमेटी ने उनकी जयंती मनाई थी। कार्यक्रम में समाज के लोगों ने उनके विचारों और योगदान को याद किया तथा उनके विचारों को पान समाज तक पहुँचाने की बात कही।
इस तरह उनके निधन के बाद भी समाज के कार्यक्रमों में उनका नाम और उनका सार्वजनिक जीवन याद किया जाता रहा।

14 अगस्त 2020 को कोरोना संक्रमण से निधन
रवीन्द्र कुमार ताँती का निधन 14 अगस्त 2020 को कोरोना संक्रमण के दौरान हुआ। उस समय उनका इलाज पटना स्थित AIIMS में चल रहा था। वे लगभग दस दिनों से अस्पताल में भर्ती थे और करीब नौ दिनों तक वेंटिलेटर पर रहे। उनके निधन से राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र में शोक व्यक्त किया गया।

बिहार विधान परिषद के तत्कालीन कार्यकारी सभापति अवधेश नारायण सिंह ने भी उनके निधन पर शोक जताया था। उन्हें वंचित वर्गों और तांती-बुनकर समाज के उत्थान के लिए काम करने वाले तथा सरल स्वभाव के नेता के रूप में याद किया गया।

रवीन्द्र कुमार ताँती के राजनीतिक जीवन की प्रमुख तारीखें
1996: पहली बार बिहार विधान परिषद के सदस्य बने।
1997: राबड़ी देवी के विधान परिषद में प्रवेश का रास्ता बनाने के लिए अपनी MLC सीट छोड़ी।
1998: दोबारा विधान परिषद के सदस्य बने।
2004 तक: उपलब्ध जानकारी के अनुसार विधान परिषद के सदस्य रहे।
2012: अति पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष के रूप में जाति प्रमाणपत्र और छात्रवृत्ति संबंधी समस्याओं पर चर्चा की।
13 जुलाई 2015: आयोग के अध्यक्ष पद से इस्तीफा प्रभावी हुआ।
20 जुलाई 2015: इस्तीफा स्वीकार किए जाने की सरकारी अधिसूचना प्रकाशित हुई।
जून 2020: विधानसभा चुनाव की तैयारियों के सिलसिले में रूपौली क्षेत्र का दौरा किया।
14 अगस्त 2020: कोरोना संक्रमण के दौरान निधन।
अगस्त 2023: मुंगेर जिले के हवेली खड़गपुर में उनकी जयंती मनाई गई।

रवीन्द्र कुमार ताँती बिहार की राजनीति और समाज से जुड़े उन नेताओं में शामिल थे, जिन्होंने विधान परिषद की सदस्यता के साथ अति पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी संभाली। पान-स्वांसी, चौपाल और बुनकर समाज से जुड़े संगठनों में उनकी सक्रियता उनके सार्वजनिक जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रही। वर्ष 1997 में राबड़ी देवी के लिए MLC की सीट छोड़ना उनके राजनीतिक सफर की चर्चित घटना थी। वहीं, वर्ष 2015 में आयोग के अध्यक्ष पद से दिया गया उनका इस्तीफा आज भी तांती-ततवा समाज के बीच त्याग पुरुष के रूप में है। 
14 अगस्त 2020 को उनके निधन के बाद भी समाज के लोग उन्हें याद करते रहे हैं। उनका राजनीतिक सफर, सामाजिक गतिविधियाँ और सार्वजनिक जीवन बिहार के राजनीतिक इतिहास का हिस्सा हैं।

Pan InQuilab TV | बिहार

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